एक बार तीन विद्धान नाव पर बैठकर नदी पार कर रहे थे वे आपस में ही एकदूसरे से बातें कर रहे थे तीनो स्वयं को एक दूसरे से श्रेष्ठ प्रतीत करने की कोशिश में लगे हुए थे कोई अपनी श्रेष्ठता की कहानी सुनाता तो कोई अपनी इसी तरह वे अपनी अपनी कहानियों द्वारा एक दूसरे को नीचा दिखाने का भरपूर प्रयास कर रहे थे लेकिन कोई श्रेष्ठ तो साबित ना हुआ पर वो अपनी अपनी कहानी सुना सुना कर थक चुके थे.
तभी उसमे से एक ने नाविक से पुछा 'हे मैन डू यू नो इंग्लिश'। ... नाविक ने कहा 'का' बाबू जी उसके इतना कहते ही सब ठहाका मारकर हसने लगे उनमे से एक बोला ओह माय गॉड यू डोंट नो इंग्लिश। ........... योर वन थर्ड लाइफ इस वेस्ट। .. तभी दूसरे ने पूछा। ......... 'तुम कितना पढ़े हो ' नाविक बोला मै कभी स्कूल ही नहीं गया... वे सब फिर हसे और बोले तब तो तुम्हारी आधी ज़िन्दगी बेकार है। ..........अब नाव लगभग नदी के बीचो बीच पहुंच चुकी थी तभी नाव हिलने लगी उन तीनों ने नाविक से पूछा ये क्यू हो रहा है नाविक ने कहा इस ओर मौसम ख़राब है इसी वजह से। ......... वे सभी नाविक को चिल्लाने लगे नाविक ने पूरी कोशिश की नाव को सँभालने की लेकिन मौसम बहुत ही ख़राब था अब नाविक को विश्वास हो गया के नाव डूब जाएगी तो उसने उन विद्वानो से पूछा बाबू जी तैरना आता है उन सभी ने चिल्लाते हुए कहा नहीं तो नाविक ने मुस्कुराते हुए कहा अरे राम तैरना नहीं आता तब तो आप लोगों की पूरी ज़िन्दगी ही बेकार है। ........
यह कहकर वो नदी में कूद गया और नाव उन सभी के साथ नदी में समां गई।



